इंडिया एनर्जी स्टैक

आईईएस: क्यों, क्या और कैसे
1. भारत में विद्युत संस्थाओं ने उपभोक्ता स्तर पर कई डिजिटल उपकरण तैयार किए हैं: जैसे स्मार्ट मीटर, रूफटॉप सोलर, इलेक्ट्रिक-वाहन चार्जिंग और मांग-पक्षीय मापन। इनमें से प्रत्येक उपकरण उपयोगी डेटा तैयार करता है। परंतु, यह डेटा अलग-अलग प्रणालियों के भीतर ही सीमित रह जाता है: जैसे डिस्कॉम का अपना सॉफ्टवेयर, मीटरिंग एजेंसी का पोर्टल (जो कि एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर या एएमआईएसपी द्वारा संचालित है), और प्रत्येक विक्रेता का डेटाबेस; और वह भी ऐसे प्रारूपों (फॉर्मेट्स) में जिन्हें अन्य प्रणालियाँ पढ़ने अथवा समझने में असमर्थ हैं। जब भी किन्हीं दो प्रणालियों के बीच डेटा साझा करने की आवश्यकता होती है, तो हर बार नए सिरे से मैनुअल कनेक्शन स्थापित करना पड़ता है। साथ ही, नियमों को कागज़ी स्तर पर ही जारी और सत्यापित किया जाता है। उपभोक्ता स्वयं अपने उपभोग संबंधी विवरणों का उपयोग नहीं कर सकते हैं। भारत ने डिजिटल उपकरणों पर निवेश किया है, लेकिन इन उपकरणों के परस्पर समन्वय और सुचारू संचालन के लिए किसी साझा व एकीकृत माध्यम को विकसित करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है।
2. इस विखंडन की वित्तीय लागत वास्तविक है, जिसका भार पूरे विद्युत क्षेत्र को वहन करना पड़ता है। एक एकल डिस्कॉम अक्सर विभिन्न कंपनियों द्वारा आपूर्ति की गई मीटरिंग प्रणालियों का संचालन करती है और उन्हें आपस में जोड़ने व सुचारू बनाने में वर्षों लगा देती है, क्योंकि इनमें से किसी भी प्रणाली का निर्माण किसी साझा या समान मानक के अनुरूप नहीं किया गया था। सिस्टम ऑपरेटरों, नियामकों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को अपनी प्रणालियों में इसी प्रकार की कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसी प्रयास को पूरे देश में बार-बार दोहराया जाता है।
3. इंडिया एनर्जी स्टैक संपूर्ण विद्युत क्षेत्र में आंकड़ों को साझा करने के लिए विशिष्टताओं का एक साझा समूह है। यह ठीक उसी प्रकार कार्य करता है जैसे बैंकिंग क्षेत्र में यूपीआई कार्य करता है। यूपीआई के पास अपनी स्वयं की कोई राशि नहीं होती है। राशि ग्राहक के बैंक में ही सुरक्षित रहती है, और यूपीआई केवल नियमों का एक साझा समूह है जो किसी भी बैंक के ऐप को अलग से कोई व्यवस्था किए बिना ही किसी अन्य बैंक के ग्राहक को भुगतान करने की सुविधा प्रदान करता है। आईईएस राशि के स्थान पर ऊर्जा संबंधी आंकड़ों के लिए काम करता है। डेटा उन्हीं प्रणालियों में सुरक्षित रहता है जिनमें वह पहले से मौजूद है, और आईईएस की विशिष्टताएँ यह सुनिश्चित करती हैं कि प्रत्येक जोड़ी के बीच पृथक रुप से कोई व्यवस्था स्थापित किए बिना ही, कोई भी प्रणाली किसी अन्य प्रणाली के साथ आंकड़ों का आदान-प्रदान कर सके। इस क्षेत्र में पहले से ही नियम और मानक लागू हैं कि कौन से आंकड़ों की रिपोर्ट करना है और उसे कैसे संरचित करना है। आईईएस उनमें से किसी को भी प्रतिस्थापित नहीं करता है। यह उसी आंकड़ों को मशीन द्वारा पढ़े जाने योग्य, पूरे क्षेत्र के लिए समान और सत्यापित करने योग्य बनाता है, ताकि कोई भी दो प्रणालियां सीधे आंकड़ों का आदान-प्रदान कर सकें और उस पर त्वरित कार्रवाई कर सकें।
4. आईईएस निम्नलिखित में से नहीं है :
- एक केंद्रीय मंच या डेटाबेस जो ऊर्जा आंकड़ों को संग्रहित करता हो;
- किसी भी मौजूदा डिस्कॉम सिस्टम, मीटर-डेटा-मैनेजमेंट सिस्टम या उपभोक्ता-सूचना प्रणाली का विकल्प;
- कोई नया नियामक या प्राधिकरण जो ऊर्जा संबंधी नियमों का निर्धारण करता हो;
- ऐसा कोई सॉफ्टवेयर उत्पाद जिसे संस्थाएं खरीदती और स्थापित करती हैं; या
- कोई ऐसी प्रणाली जो भौतिक ग्रिड को नियंत्रित या उसकी निगरानी करती हो।
5. आईईएस विद्युत क्षेत्र में किन्हीं दो प्रणालियों द्वारा आपस में साझा किए जाने वाले आंकड़ों के विषय में जानकारी देता है। यह तीन चरणों में कार्य करता है:
- पंजीकरण (सत्यापन योग्य डिजिटल पहचान): प्रत्येक भागीदार को एक डिजिटल पहचान मिलती है और उन्हें एक साझा निर्देशिका में सूचीबद्ध किया जाता है। यह प्रक्रिया केवल एक बार की जाती है। उदाहरण के लिए, डब्ल्यू3सी विकेंद्रीकृत पहचानकर्ताओं का उपयोग किया जाता है।
- खोजें (इंटरैक्शन प्रोटोकॉल): प्रत्येक लेन-देन से पूर्व, दोनों प्रणालियाँ एक-दूसरे का सत्यापन करती हैं, यह पुष्टि करती हैं कि दूसरी प्रणाली प्रामाणिक है, तथा इस बात पर सहमत होती हैं कि किन आंकड़ों का और किन शर्तों पर आदान-प्रदान किया जाएगा। इसके लिए किन्हीं दो पक्षों के मध्य अलग से किसी द्विपक्षीय व्यवस्था की आवश्यकता नहीं होती है। उदाहरण के लिए, यह प्रक्रिया बेकन प्रोटोकॉल का उपयोग करती है।
- विनिमय (स्कीमा, वर्गीकरण और सत्यापन योग्य क्रेडेंशियल्स): डेटा सहमत क्षेत्र नामों और संरचना का उपयोग करके और उस डोमेन के लिए सार्वजनिक मानक का पालन करते हुए आगे बढ़ता है: जैसे मीटर डेटा के लिए डीएलएमएस/सीओएसईएम, सौर और भंडारण के लिए आईईईई 2030.5 और मांग प्रतिक्रिया के लिए ओपनएडीआर। जहां उपयोग के लिए एक स्थायी रिकॉर्ड की आवश्यकता होती है, वहाँ इस विनिमय (एक्सचेंज) के माध्यम से एक सत्यापन योग्य क्रेडेंशियल भी तैयार करता है, जैसे कि उपभोक्ता ऊर्जा पासपोर्ट, उपभोक्ता मीटर डाइजेस्ट, या डीईआर कमीशनिंग रिकॉर्ड। धारक इसे डिजिलॉकर में रखता है और इसे जारीकर्ता के पास वापस आए बिना किसी भी बैंक, नियामक या योजना प्रशासक के साथ साझा कर सकता है।
आईईएस प्रत्येक चरण के लिए उपयुक्त ओपन स्टैंडर्ड का चयन करता है और उसी के आधार पर एक विशिष्टता जारी करता है। आईईएस नए मानकों का निर्माण नहीं करता है। आईईएस की विशिष्टताओं के अनुरूप केवल एक बार प्रणाली विकसित करने के पश्चात, वह प्रणाली किसी भी अन्य आईईएस-सक्षम प्रणाली से बिना किसी नए एकीकरण कार्य के सीधे जुड़ सकती है।
6. किसी संगठन की अपनी आंतरिक प्रणालियों में कोई बदलाव नहीं किया जाता है। प्रत्येक प्रणाली के छोर (एज) पर 'अडैप्टर' नामक सॉफ्टवेयर का एक छोटा सा अंश स्थापित होता है, जो आईईएस की विशिष्टताओं के अनुरूप संचालन सुनिश्चित करता है। यह अडैप्टर दो भागों में विभाजित होता है। इसका पहला भाग पहले से तैयार होता है और सभी के लिए समान रहता है: यह अन्य प्रणालियों को खोजने और उनके साथ संदेशों का आदान-प्रदान करने का कार्य करता है। यह 'बेकन ऑनिक्स' संदर्भ सॉफ्टवेयर है, जिसे प्रतिभागी को स्वयं बनाने की आवश्यकता नहीं होती है।"
इसका दूसरा भाग प्रत्येक संगठन के लिए विशिष्ट होता है: यह मैपिंग का एक छोटा सा भाग है जो संगठन के अपने डेटा प्रारूपों और आईईएस की विशिष्टताओं के बीच परिवर्तन का कार्य करता है। इसे केवल एक बार ही स्थापित करना होता है। इसके बाद संगठन के डेटाबेस, फ़ील्ड नाम और आंतरिक सॉफ्टवेयर बिल्कुल वैसे ही बने रहते हैं जैसे कि वे पहले थे। एक बार यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद, कोई भी नया आईईएस-सक्षम भागीदार बिना किसी अतिरिक्त एकीकरण कार्य के सीधे जुड़ जाता है।
7. उदाहरण के लिए, जब इंडिया एनर्जी स्टैक का उपयोग किया जाता है, तब निम्नलिखित कार्य संभव हैं:
- उपभोक्ताओं के लिए : किसी उपभोक्ता का ऊर्जा संबंधी इतिहास पोर्टेबल और सत्यापन योग्य बन जाता है। इसका उपयोग डिस्कॉम को संपर्क या कागजी कार्रवाई के बिना, 'ग्रीन लोन' प्राप्त करने, सब्सिडी का दावा करने अथवा किसी अन्य सेवा के लिए पंजीकरण कराने में किया जा सकता है। डिस्कॉम द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्र बैंकों, आवास वित्त कंपनियों, योजना प्रशासकों और सेवा प्रदाताओं के लिए सीधे उपयोगी हैं, जिन्हें सत्यापित ऊर्जा डेटा की आवश्यकता होती है। जब उपभोक्ता अपने ऊर्जा इतिहास को प्रमाणित करने में सक्षम हो जाते हैं, तो उन प्रमाणपत्रों की मांग का सीधा लाभ डिस्कॉम को मिलता है।
- ग्रिड के लिए: प्रत्येक वितरित ऊर्जा संसाधन को, उदाहरण के लिए एक रूफटॉप सोलर यूनिट या एक छोटी बैटरी को, पहली बार कनेक्ट होने पर एक सत्यापित पहचान प्रदान की जाती है। ग्रिड ऑपरेटरों को इन संसाधनों की विश्वसनीय दृश्यता प्राप्त होती है, और डिस्कॉम, एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर्स और एग्रीगेटर्स (कंपनियां जो कई छोटे संसाधनों को एक साथ जोड़ती हैं) के बीच कनेक्शन प्रत्येक जोड़ी के लिए अलग से कोई व्यवस्था किए बिना ही संभव हो जाता है।
- नियामकों के लिए: नियामक के पास पहुँचने वाली फाइलिंग पहले से ही हस्ताक्षरित और एक समान, सुसंगत प्रारूप में होती हैं। टैरिफ आदेश गणना योग्य हो जाते हैं। नियामक पीडीएफ दस्तावेजों को पढ़ने के बजाय सीधे डेटा की निगरानी करने की स्थिति में आ जाते हैं।
- बाजारों के लिए: मांग-पक्ष का लचीलापन, पीयर-टू-पीयर ऊर्जा विनिमय (उपभोक्ताओं द्वारा आपस में सीधे बिजली की खरीद और बिक्री), और ओपन एक्सेस (एक बड़े उपभोक्ता द्वारा स्थानीय डिस्कॉम के अलावा किसी अन्य आपूर्तिकर्ता से बिजली खरीदना) व्यावहारिक रूप से व्यवहार्य हो जाते हैं, और इसके लिए भागीदारों के प्रत्येक जोड़े के बीच अलग से किसी समझौते की आवश्यकता नहीं होती है।
8. आईईएस ने इस क्षेत्र में क्या परिवर्तन किए हैं: सामूहिक रूप से, ये विशिष्टताएं निम्नलिखित व्यावहारिक परिणाम उत्पन्न करती हैं:
- एकीकरण लागत कम हो जाती है: एक प्रकाशित मानक प्रत्येक बिंदु-दर-बिंदु के लिए किए जाने वाले अलग और कस्टमाइज़्ड कार्य की जगह ले लेता है। परिणामस्वरूप, किसी भी नए सिस्टम को जोड़ने (इंटीग्रेशन) का कार्य महीनों के बजाय कुछ ही दिनों में संपन्न हो जाता है।
- कोई वेंडर लॉक-इन नहीं रहता: आईईएस अनुरूपता को क्रय विनिर्देशों में ही समाहित कर दिया जाता है। इसके परिणामस्वरूप, विक्रेता एक प्रकाशित मानक के अनुरूप ही प्रणालियों का निर्माण करते हैं, जिससे संस्थाएं किसी एक एकल आपूर्तिकर्ता पर निर्भर रहने के लिए बाध्य नहीं होती है।
- प्रत्येक नई क्षमता के विकास पर पिछली क्षमता की तुलना में कम लागत होती है: पहचान और विश्वसनीयता के मूलभूत ढांचे का पुन: उपयोग किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप वितरित संसाधन, लचीलापन और बाजार से जुड़े विभिन्न उपयोग-मामले पहले से स्थापित व्यवस्था के आधार पर ही विकसित हो जाते हैं।
- नई सेवाएं व्यवहार्य बन जाती हैं: "बैंक, वित्तीय संस्थान और एग्रीगेटर्स, सत्यापित ऊर्जा डेटा के आधार पर नई सेवाओं का निर्माण कर सकते हैं; ठीक उसी प्रकार जैसे वित्तीय क्षेत्र में 'अकाउंट एग्रीगेटर' फ्रेमवर्क के आने पर नए ऋणदाताओं ने किया था। इससे डेटा की एक ऐसी मांग उत्पन्न होती है, जिसका सीधा लाभ डिस्कॉम को मिलता है।
- मौजूदा डेटा अधिक उपयोगी हो जाता है: एक बार जब ऊर्जा डेटा सत्यापन योग्य और एक साझा प्रारूप में आ जाता है, तो इसका उपयोग बिजली खरीद और मांग के पूर्वानुमान के लिए, हानि को कम करने व लोड प्रबंधन जैसे विश्लेषणों के लिए, और हरित ऋण जैसी सहमति-आधारित सेवाओं के आधार के रूप में किया जा सकता है। यह वही डेटा है जो डिस्कॉम के पास पहले से उपलब्ध है, परंतु अब यह उस मूल प्रणाली के दायरे से बाहर भी उपयोग करने योग्य बन जाता है जिसने इसे बनाया था।
9. आईईएस पहले से ही एक परीक्षण वातावरण में चल रहा है। इसकी विशिष्टताओं को आईईएस गिटबुक पर प्रकाशित कर दिया गया है, और इसका सैंडबॉक्स भी कार्यरत है। चार राज्यों के चार पायलट डिस्कॉम वर्तमान में एक 30-दिवसीय चुनौती (21 मई से 21 जून 2026) से गुजर रहे हैं, जिसके अंतर्गत प्रत्येक डिस्कॉम ने अपने आईईएस अडैप्टर का निर्माण किया है और लाइव उपयोग-मामलों के पहले सेट का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है:
- पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल), मेरठ, उत्तर प्रदेश;
- ईस्टर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ऑफ आंध्र प्रदेश लिमिटेड (एपीईडीसीएल), विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश;
- दक्षिण गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (डीजीवीसीएल), सूरत, गुजरात; और;
- टाटा पावर, मुंबई, महाराष्ट्र।
प्रदर्शित किए गए चार उपयोग-मामले इस प्रकार थे: डीईआर विजिबिलिटी, कंज्यूमर एनर्जी पासपोर्ट, कंज्यूमर मीटर डाइजेस्ट, और स्मार्ट मीटर डेटा एक्सचेंज। दर्ज किए गए परिणामों का विवरण निम्न हैं:
| उपयोग का मामला | क्या प्रदर्शित किया गया था | आईईएस के साथ | आईईएस से पहले |
| डीईआर विजिबिलिटी | सत्यापित डिजिटल पहचान के साथ सौर इकाई पंजीकृत; ग्रिड ऑपरेटर को इसकी दृश्यता की पुष्टि की गई | [X] | कोई विश्वसनीय क्षेत्र-व्यापी विधि मौजूद नहीं थी |
| उपभोक्ता ऊर्जा पासपोर्ट | ऊर्जा पासपोर्ट जारी किया गया और डिजिलॉकर में संग्रहित किया गया; उपभोक्ता इसे ग्रीन लोन, सब्सिडी दावा या सेवा नामांकन के लिए साझा करने में सक्षम है | [X] | पहले संभव नहीं: कोई पोर्टेबल, सत्यापन योग्य उपभोक्ता ऊर्जा रिकॉर्ड मौजूद नहीं था |
| उपभोक्ता मीटर डाइजेस्ट | खपत के इतिहास का सत्यापन योग्य रिकॉर्ड, जो बिना दोबारा सत्यापन किए विभिन्न डिस्कॉम और राज्यों में पुनः उपयोग के योग्य है। | [X] | मैनुअल और एक ही डिस्कॉम तक सीमित; कहीं और पुन: प्रयोज्य नहीं |
| स्मार्ट मीटर डेटा एक्सचेंज | द्विपक्षीय एकीकरण समझौते के बिना डिस्कॉम और एएमआईएसपी के बीच आईईएस-अनुरूप डेटा विनिमय पूरा हुआ | [X] | प्रत्येक जोड़ी के लिए द्विपक्षीय एकीकरण में सप्ताहों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है। |
10. सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों और विद्युत क्षेत्र की सभी संस्थाओं से इसमें भाग लेने का अनुरोध किया जाता है। इसके अंतर्गत वितरण उपयोगिताओं, उत्पादन कंपनियों (जीईएनसीओ), पारेषण कंपनियों (ट्रांसको), राज्य भार प्रेषण केंद्रों और राष्ट्रीय भार प्रेषण केंद्र, केंद्रीय और राज्य विद्युत विनियामक आयोगों और विनियामकों के मंच, मीटरिंग एजेंसियों (एएमआईएसपी), उपकरण निर्माताओं (इलेक्ट्रिक-वाहन और मीटरिंग ओईएम सहित), प्रौद्योगिकी एवं विश्लेषण प्रदाताओं, एग्रीगेटर्स और सत्यापित ऊर्जा डेटा का उपयोग करने वाले वित्तीय संस्थानों से भागीदारी की अपेक्षी की जाती है। भागीदारी के लिए आवश्यक न्यूनतम मानदेड प्रत्येक संगठन के लिए एक समान है: एक डिजिटल पहचान बनाना और संगठन को शेयर्ड डायरेक्टरी में सूचीबध्द करना; आईईएस अडैप्टर का निर्माण करना; और बुनियादी अनुरूपता जांच को उत्तीर्ण करना। इसके पश्चात, प्रत्येक नया भागीदार बिना किसी नए एकीकरण कार्य के सीधे जुड़ जाता है।









