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REC Limited

इंडिया एनर्जी स्टैक

एफएक्यू-आईईएस

India Energy Stack (IES)
इंडिया एनर्जी स्टैक
ऊर्जा क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना
 इंडिया एनर्जी स्टैक (आईईएस) भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्र, इंटरऑपरेबल डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा-संचालित नवाचार के माध्यम से भारत के ऊर्जा क्षेत्र के भविष्य को सक्षम बनाना है। इस पहल का मार्गदर्शन श्री नंदन नीलेकणि मुख्य संरक्षक के रूप में कर रहे हैं। आरईसी लिमिटेड इसकी नोडल एजेंसी है, जिसमें एफएसआर ग्लोबल नॉलेज पार्टनर है।

सामान्य प्रश्नों के उत्तर

निम्नलिखित उत्तर सुलभ संदर्भ हेतु प्रस्तुत किए गए हैं तथा इस दस्तावेज़ के भाग हैं।

1.  क्या आईईएस मौजूदा प्रणालियों का स्थान लेता है?
नहीं। आईईएस किसी भी डेटा या प्रणाली का भंडारण, संचालन या नियंत्रण नहीं करता है। वर्तमान में किसी संगठन द्वारा संचालित की जा रही सभी प्रणालियाँ निरंतर कार्य करती रहेंगी। आईईएस केवल अन्य संगठनों की प्रणालियों के साथ डेटा साझा करने की पद्धति का मानकीकरण करता है।

2. क्या आईईएस केवल अन्य संगठनों से जुड़ने के लिए है, या आंतरिक प्रणालियों के लिए भी है?

मुख्य रूप से किसी संगठन की प्रणालियों को अन्य संगठनों की प्रणालियों से जोड़ने के लिए, जहाँ वर्तमान में सबसे अधिक कठिनाई आती है। यही एडेप्टर और मानक किसी संगठन के भीतर भी सहायता करते हैं, जहाँ विभिन्न विक्रेताओं (वेंडर्स) की कई प्रणालियाँ आपस में डेटा का आदान-प्रदान करने में सक्षम नहीं हो पाती हैं। इसका बड़ा लाभ बाहरी है, जो डिस्कॉम और राज्यों के बीच होता है। आंतरिक सुधार इसके बाद स्वतः ही सुनिश्चित होता है।

3. क्या आईईएस के कारण नए अनुपालन कार्य का सृजन होगा?

जी नहीं। आईईएस किसी नए डेटा की अपेक्षा नहीं करता है। यह साझा किए जाने वाले समय केवल पहले से तैयार उत्पादित डेटा को एक समान प्रारूप में व्यवस्थित करता है।

4. यदि कोई मीटरिंग प्रणाली हाल ही में एकीकृत की गई है, तो क्या वह कार्य निष्फल हो जाएगा?

जी नहीं। आईईएस के अंतर्गत पूर्व-निर्मित कार्य को पुन: करने की आवश्यकता नहीं है। यह एक समान मानक निर्धारित करता है जिसका अनुगमन आगामी एकीकरण द्वारा किया जाएगा, जिससे आगामी प्रक्रिया अधिक सुगम हो जाएगी।

5. डेटा कहाँ प्रेषित होता है?

किसी नए स्थान पर नहीं। डेटा अपने उत्पत्ति स्थल पर ही रहता है। आईईएस केवल उस पद्धति का मानकीकरण करता है जिसके द्वारा डेटा को एक संगठन से दूसरे संगठन में स्थानांतरित करते समय वर्णित और अनुरोधित किया जाता है।

6. क्या आईईएस कोई ऐसी चीज़ है जिसे खरीदा और स्थापित किया जाना है?

जी नहीं। आईईएस मुक्त एवं प्रकाशित विनिर्देशों का एक समुच्चय है। इसके लिए कोई लाइसेंस शुल्क देय नहीं है और न ही अधिष्ठापन हेतु कोई केंद्रीय मंच है। आरंभ करने के लिए एक पूर्व-निर्मित कनेक्टर यानी अडैप्टर प्रदान किया जाता है।

7. कनेक्टर का निर्माण कौन करता है?

कनेक्टर, जिसे अडैप्टर कहा जाता है, अधिकांशतः पूर्व-निर्मित होते है। आईईएस इसे बेकन ओनिक्स संदर्भ कार्यान्वयन पर आधारित मुक्त सॉफ्टवेयर के रूप में, एक कार्यशील प्रतिदर्श (वर्किंग सैंपल) के साथ उपलब्ध कराता है। किसी संगठन का प्रौद्योगिकी विक्रेता इसे उसकी प्रणालियों के लिए कॉन्फ़िगर करता है तथा इसके डेटा प्रारूप और आईईएस प्रारूप के मध्य रूपांतरण को जोड़ता है। विक्रेता प्रत्येक बार नए सिरे से कस्टम एकीकरण करने के बजाय, एक ही प्रकाशित मानक के अनुसार निर्माण करते हैं।

8. क्या आईईएस नियामक के साथ संबंधों में कोई परिवर्तन लाता है?

जी नहीं। आईईएस केवल विद्यमान सीईए और सीईआरसी नियमों को ऐसे प्रारूप में परिवर्तित करता है जो सॉफ्टवेयर द्वारा पठनीय हो। यदि किसी नियम को कार्यान्वित करने पर कोई विसंगति (अंतर) प्रकट होती है, तो आईईएस नियामक को उससे अवगत कराता है। इस विषय में आगामी कार्रवाई का निर्धारण केवल नियामक द्वारा ही किया जाता है।

9. उपभोक्ता के निजी डेटा की सुरक्षा किस प्रकार की जाती है?

उपभोक्ता शेष आंकड़ों (डेटा) को सार्वजनिक/प्रकट किए बिना किसी एकल तथ्य को प्रमाणित कर सकता है, उदाहरणार्थ—यह कि स्वीकृत भार एक निर्दिष्ट स्तर से अधिक है।

10. क्या आईईएस लाइव हो चुका है, या अभी भी केवल कागज़ पर ही है?

यह लाइव है। सैंडबॉक्स सक्रिय रूप से चल रहा है, और चार पायलट डिस्कॉम वर्तमान में इसमें निर्माण कार्य कर रहे हैं।

11. कुछ कार्य पहले से ही एक ही डिस्कॉम के भीतर किए जा सकते हैं। फिर आईईएस की क्या आवश्यकता है?

कुछ प्रकार के कार्य, जैसे कि एकल क्षेत्र के भीतर मांग का स्थानांतरण, आज स्वतंत्र रूप से निष्पादित किए जा सकते हैं। किंतु आईईएस  संपूर्ण देश के लिए निर्मित है, और इससे न केवल दूसरों को बल्कि प्रत्येक भागीदार को लाभ मिलता है। किसी अन्य राज्य से आने वाला उपभोक्ता ऐसे ऊर्जा रिकॉर्ड के साथ आता है जिस पर बिना किसी नए सत्यापन के तत्काल विश्वास किया जा सकता है। भारत में कहीं भी कोई भी बैंक या योजना किसी डिस्कॉम द्वारा जारी रिकॉर्ड को स्वीकार कर सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को तीव्र सेवा प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त, एक राज्य में प्रमाणित सेवा या विक्रेता, बिना पुन: निर्माण के अन्य राज्यों के लिए भी उपलब्ध हो जाता है। पृथक रूप से कार्य करते हुए, प्रत्येक डिस्कॉम एक ही समस्या का समाधान स्वयं करता है। एक समान मानक होने से, कार्य केवल एक बार संपन्न होता है और प्रत्येक भागीदार उसका उपयोग कर सकता है

12. उपभोक्ता को क्या प्राप्त होता है?

डिस्कॉम के साथ उनके संयोजन (कनेक्शन) का एक पोर्टेबल एवं सत्यापन योग्य अभिलेख—जिसमें स्वीकृत भार, कोई भी स्वीकृत उत्पादन और उनका अपना उपभोग इतिहास सम्मिलित है—डिजीलॉकर (सरकार के डिजिटल दस्तावेज़ लॉकर) में सुरक्षित रहता है। उपभोक्ता प्रत्येक बार कागजी कार्रवाई के लिए डिस्कॉम के चक्कर लगाए बिना, अपनी शर्तों पर हरित ऋण (ग्रीन लोन) प्राप्त करने, सब्सिडी का दावा करने अथवा किसी सेवा के लिए पंजीकरण करने हेतु इसे साझा कर सकता है। पोर्टेबल एवं सत्यापन योग्य अभिलेख उपयोगिता (विद्युत प्रदाता कंपनी) को अपने उपभोक्ता आधार को बेहतर ढंग से सेवा प्रदान करने में भी सहायता करते हैं: जिससे त्वरित नामांकन, बार-बार होने वाले सत्यापनों में कमी, और सहमति-आधारित आंकड़ों (डेटा) पर नई सेवाओं का निर्माण संभव होता है।

13. क्या आईईएस ऐसे संगठन के लिए भी प्रासंगिक है जिसका मुख्य उद्देश्य नई प्रणालियों के निर्माण के स्थान पर अपनी विद्यमान प्रणालियों में सुधार करना है?

  जी हाँ। वही एक बार इस्तेमाल होने वाला अडैप्टर दोनों काम करता है। यह वर्तमान प्रणालियों के मध्य होने वाले डेटा विनिमय में सुधार करता है, तथा आगामी समय में उसी समान मानक पर नई सेवाओं को जोड़ने हेतु आधार प्रदान करता है। विद्यमान प्रणालियों में सुधार करने और नवीन प्रणालियों का निर्माण करने में से किसी एक को चुनने की कोई आवश्यकता नहीं है।

14. यदि आगामी समय में किसी नवीन सेवा अथवा किसी नए प्रकार के उपकरण को सम्मिलित किया जाता है, तो क्या यह प्रक्रिया पुन: प्रारंभ से शुरू होती है?

जी नहीं। प्रत्येक परिसंपत्ति (जैसे मीटर, सौर इकाई अथवा ईवी चार्जर) को उसकी डिजिटल पहचान उसी क्षण प्रदान की जाती है जब किसी व्यावहारिक उपयोग (यूज़ केस) हेतु सर्वप्रथम उसकी आवश्यकता होती है, न कि प्रथम दिन ही एक साथ। पूर्व से उपलब्ध समस्त तत्वों—यथा सत्यापित पहचान, विश्वसनीयता की जांच और स्वीकृत डेटा प्रारूपों का पुन: उपयोग किया जाता है। प्रथम परिसंपत्ति को संबद्ध करने में सर्वाधिक प्रयास करना पड़ता है। तत्पश्चात जोड़ी जाने वाली प्रत्येक परिसंपत्ति का कार्य अत्यंत सरल हो जाता है।

15. क्या आईईएस विद्युत क्षेत्र हेतु निर्धारित साइबर सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करता है?

जी हाँ। आईईएस को विद्युत क्षेत्र के लिए लागू साइबर सुरक्षा विनियमों के अनुपालन हेतु डिज़ाइन किया जा रहा है। प्रत्येक संदेश एक डिजिटल हस्ताक्षर युक्त होता है, तथा पहचान, सहमति और डेटा परतों को पृथक रखा जाता है। अडैप्टर केवल प्रणाली के बाह्य छोर पर स्थापित होता है तथा नए आंतरिक एकीकरण बिंदु उत्पन्न नहीं करता है। साइबर सुरक्षा घटनाएं, विद्युत क्षेत्र की स्थापित घटना प्रतिक्रिया प्रक्रिया के अनुरूप संचालित होती हैं। आईईएस मुख्य रूप से गैर-सुरक्षा-महत्वपूर्ण का उपयोग करते हुए, संबंधित पक्षों के मध्य डेटा विनिमय हेतु एक सुरक्षित लिंक सुलभ कराता है तथा इसके लिए समस्त डेटा को किसी केंद्रीय मार्ग-अवरोध गुजारने की अनिवार्यता नहीं होती है। 

16. क्या आईईएस व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करता है?

जी हाँ। आईईएस व्यक्तिगत आंकड़ों (डेटा) को संग्रहीत नहीं करता है। उपभोक्ता संबंधी आंकड़े केवल उपभोक्ता की स्पष्ट सहमति से और केवल उल्लिखित प्रयोजन के लिए ही साझा किए जाते हैं। आईईएस को लागू डेटा संरक्षण कानून अनुपालन हेतु डिज़ाइन किया जा रहा है।

17. आईईएस से किसी डिस्कॉम को व्यावसायिक रूप से क्या लाभ होता है?

सरल शब्दों में तीन बिंदु प्रासंगिक हैं। प्रथम, न्यून लागत: एक एकल प्रकाशित मानक बार-बार होने वाले प्रणालियों के पारस्परिक एकीकरण कार्य को प्रतिस्थापित करता है, जिससे प्रौद्योगिकी खरीद एवं एकीकरण व्यय में कमी आती है, तथा किसी एकल विक्रेता पर निर्भरता समाप्त होती है। द्वितीय, बेहतर परिचालन (ऑपरेशंस): विश्वसनीय एवं सत्यापन योग्य आंकड़े मांग के पूर्वानुमान तथा विश्लेषण का आधार बनते हैं, जिससे समयानुसार विद्युत खरीद में सुधार किया जा सकता है एवं हानियों (लॉसेस) को कम किया जा सकता है। तृतीय, विद्यमान आंकड़ों का व्यापक उपयोग: उपभोक्ता की सहमति से, सत्यापित अभिलेख हरित ऋण (ग्रीन लेंडिंग) और रूफटॉप सोलर वित्तीयन जैसी सेवाओं को सुलभ बना सकते हैं, और इन अभिलेखों की मांग अंततः डिस्कॉम के माध्यम से ही प्रवाहित होती है। आईईएस कोई राजस्व अर्जन योजना नहीं है और यह व्यक्तिगत डेटा का मुद्रीकरण नहीं करता है। यह लागत को कम करता है तथा डिस्कॉम द्वारा पूर्व से धारित आंकड़ों की उपयोगिता में वृद्धि करता है।

18. क्या आईईएस वृहद या थोक (बल्क) डेटा स्थानांतरण का समर्थन करता है?

जी हाँ, बिना किसी आकार सीमा के। आईईएस ( डेटा प्रारूप (फॉर्मेट) और समन्वय को निर्दिष्ट करता है, न कि उसके परिवहन को; अतः डेटा सदैव संगठन के सामान्य माध्यमों, जैसे सुरक्षित वेब कनेक्शन अथवा फ़ाइल स्थानांतरण के द्वारा ही गतिमान होता है। इसके दो विकल्प उपलब्ध हैं। प्रथम, इनलाइन: डेटा स्वयं आईईएस-प्रारूपित संदेशों के भीतर ही छोटे बैचों में भेजा जाता है। द्वितीय, लिंक द्वारा: डेटा एक फ़ाइल के रूप में ही रहता है, तथा आईईएस संदेश में उसे प्राप्त करने के लिए एक हस्ताक्षरित लिंक संलग्न होता है। दोनों में से किसी भी विधि में, आईईएस खोज, सहमति और ऑडिट ट्रेल (लेखा-परीक्षा मार्ग) का प्रबंधन करता है, और किसी पृथक बल्क फीचर (थोक सुविधा) की आवश्यकता नहीं होती है।

19. विशिष्टताओं और मानकों को जोड़ने अथवा उन्हें अद्यतन करने का कार्य किसके द्वारा किया जाता है?

यह आईईएस सेल की भूमिका है, जो संपूर्ण क्षेत्र के प्रतिनिधित्व के साथ केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अंतर्गत गठित किया जा रहा एक शासी निकाय है। यह विशिष्टताओं स्वामित्व रखता है, यह निर्धारित करता है कि क्या जोड़ा या परिवर्तित किया जाना है, और प्रत्येक संस्करण को प्रकाशित करता है। इसके विस्तृत शासन ढांचे (गवर्नेंस फ्रेमवर्क) को अलग से अधिसूचित किया जाएगा।

20. प्रकाशित विशिष्टताओं में संशोधन अथवा परिवर्तन हेतु अनुरोध करने की क्या प्रक्रिया है?

कोई भी प्रतिभागी आईईएस सेल को संशोधन का प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकता है। प्रस्तावों की समीक्षा की जाती है, तथा स्वीकृत परिवर्तनों को एक नवीन, संस्करण-युक्त विशिष्टता के रूप में प्रकाशित किया जाता है, जिससे प्रत्येक कार्यान्वयन को यह ज्ञात रहे कि क्या परिवर्तन और कब किया गया है। आईईएस सेल के शासन ढांचे (गवर्नेंस फ्रेमवर्क) को अधिसूचित किए जाने के पश्चात इस विस्तृत प्रक्रिया को निर्धारित किया जाएगा।

 

पृष्ठ को अंतिम बार अद्यतन किया गया: 21/07/2026 - 03:41 PM
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