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मीडिया लाउंज

सेबी के रेगुलेटरी सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क के तहत आरईसी लिमिटेड ने भारत में टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड का पहला पायलट निर्गम सफलतापूर्वक किया
तारीख 08-09-2026

नई दिल्ली, 07 सितंबर 2026: विद्युत मंत्रालय के अधीन महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (CPSE) और प्रमुख NBFC-IFC आरईसी लिमिटेड ने भारतीय पूंजी बाजार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के रेगुलेटरी सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क के तहत भारत में टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड का पहला पायलट निर्गम सफलतापूर्वक किया है।

इस पायलट निर्गम का आकार ₹500 करोड़ था, जिसमें ₹100 करोड़ का बेस इश्यू तथा ₹400 करोड़ का ग्रीन शू विकल्प शामिल था। इसके लिए बोली प्रक्रिया नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (NSE) के EBP प्लेटफॉर्म पर आयोजित की गई।

अत्याधुनिक बाजार नवाचारों के प्रति निवेशकों के मजबूत विश्वास और उत्साह को दर्शाते हुए इस निर्गम को बाजार से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। इस निर्गम के लिए ₹796 करोड़ की बुक बिल्डिंग हुई, यानी यह लगभग 8 गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ। आरईसी ने 7.30 प्रतिशत प्रतिवर्ष की कूपन दर पर 1 वर्ष 9 महीने की अवधि के लिए ₹500 करोड़ की राशि स्वीकार की।

इस पायलट निर्गम की सफलता SEBI, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सभी भागीदार बाजार अवसंरचना संस्थानों (MIIs)—जिसमें NPCI, डिपॉजिटरी और स्टॉक एक्सचेंज शामिल हैं—के दूरदर्शी दृष्टिकोण और समन्वित प्रतिबद्धता को दर्शाती है। टोकनाइज्ड माध्यम के जरिए सेटलमेंट प्रक्रिया को अधिक तेज बनाया गया, जिसके तहत पे-इन, आवंटन और बॉन्ड की लिस्टिंग एक ही दिन में पूरी हुई। इन बॉन्ड्स को NSE और BSE Limited पर सूचीबद्ध किया गया है।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर आरईसी के निदेशक (वित्त) श्री राजेश कुमार ने कहा, “भारत के पूंजी बाजारों को प्रगतिशील विनियमों, सक्रिय हितधारक परामर्श और प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों के माध्यम से मजबूत करने में दूरदर्शी नेतृत्व के लिए हम SEBI के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। कारोबार करने में सुगमता, बाजार दक्षता में सुधार और नियामकीय प्रक्रियाओं में तेज बदलाव पर SEBI के निरंतर ध्यान ने भारतीय वित्तीय बाजारों की गहराई और मजबूती को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।”

यह निर्गम भारत के पूंजी बाजार में एक परिवर्तनकारी कदम है, जिसमें एटॉमिक डिलीवरी-वर्सस-पेमेंट (DvP) सेटलमेंट और शेयर्ड-लेजर पारदर्शिता की शुरुआत की गई है।

श्री राजेश कुमार ने कहा, “Demat 2.0 पहल और कॉरपोरेट बॉन्ड का टोकनाइजेशन भारत के ऋण बाजारों के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मौजूदा निवेशक सुरक्षा और नियामकीय सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी और CBDC-सक्षम सेटलमेंट का लाभ उठाकर SEBI पूंजी बाजार के अगले चरण के बुनियादी ढांचे की नींव तैयार कर रहा है।”

Demat 2.0 के माध्यम से प्रतिभूतियों के स्वामित्व को एक अनुमत (Permissioned) डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर पर सुरक्षित रूप से दर्ज और ट्रैक किया जाता है। इससे सेटलमेंट से जुड़े जोखिमों और परिचालन संबंधी जटिलताओं को कम करने में मदद मिलती है, जबकि वैधानिक सुरक्षा उपायों और संस्थागत अनुपालन को बरकरार रखा जाता है।

आरईसी लिमिटेड के बारे में-

आरईसी भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक 'महारत्न' कंपनी है, और आरबीआई के साथ गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी (एनबीएफसी), सार्वजनिक वित्तीय संस्थान (पीएफआई) और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग कंपनी (आईएफसी) के रूप में पंजीकृत है। आरईसी पूरे विद्युत-अवसंरचना क्षेत्र को वित्तपोषित कर रहा है जिसमें उत्पादन, पारेषण, वितरण, नवीकरणीय ऊर्जा और नई प्रौद्योगिकियां जैसे इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी भंडारण, पंप भंडारण परियोजनाएं, ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया परियोजनाएं आदि शामिल हैं। हाल ही में आरईसी लिमिटेड ने गैर-विद्युत अवसंरचना क्षेत्र में भी विविधता लाई है जिसमें सड़क और एक्सप्रेसवे, मेट्रो रेल, हवाई अड्डे, आईटी संचार, सामाजिक और वाणिज्यिक अवसंरचना (शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल), बंदरगाह और इस्पात, रिफाइनरी आदि जैसे विभिन्न अन्य क्षेत्रों के संबंध में इलेक्ट्रो-मैकेनिकल (ईएंडएम) कार्य शामिल हैं।

आरईसी लिमिटेड देश में अवसंरचना परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए राज्य, केंद्र और निजी कंपनियों को विभिन्न परिपक्वताओं के ऋण प्रदान करता है। आरईसी लिमिटेड बिजली क्षेत्र के लिए सरकार की प्रमुख योजनाओं में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक भूमिका निभा रहा है और प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य), दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई), राष्ट्रीय विद्युत निधि (एनईएफ) योजना के लिए नोडल एजेंसी रही है, जिसके परिणामस्वरूप देश में अंतिम मील वितरण प्रणाली, 100% गांव विद्युतीकरण और घरेलू विद्युतीकरण को मजबूत किया गया है। आरईसी को पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के अंतर्गत कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने आरईसी को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के कार्यान्वयन की ज़िम्मेदारी भी सौंपी है।

पृष्ठ को अंतिम बार अद्यतन किया गया: 09/09/2026 - 03:41 PM
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