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आरईसी का एक और रिकॉर्ड वार्षिक वित्तीय प्रदर्शन; अब तक का सर्वाधिक तिमाही एवं वार्षिक लाभ क्रमशः ₹ 3,001 करोड़ एवं ₹ 11,055 करोड़ दर्ज किया
तारीख 18-05-2023

गुरुग्राम, 18 मई 2023: आरईसी लिमिटेड के निदेशक मंडल ने 31 मार्च 2023 को समाप्त तिमाही और वर्ष के लिए लेखापरीक्षित स्टैंडअलोन और समेकित वित्तीय परिणामों को अनुमोदित किया।
परिचालन और वित्तीय विशेषताएं-वित्तीय वर्ष 2022 के 12 माह की तुलना में वित्तीय वर्ष 2023 के 12 माह (स्टैंडअलोन) –
संस्वीकृत: ₹ 54,421 करोड़ की तुलना में ₹ 2,68,461 करोड़
संवितरणः ₹ 64,150 करोड़ की तुलना में ₹ 96,846 करोड़
निवल लाभः ₹ 10,046 करोड़ की तुलना में ₹ 11,055 करोड़, 10% की वृद्धि
परिसंपत्ति गुणवत्ता और दबावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान में सुधार के चलते, आरईसी ने अब तक का सर्वाधिक तिमाही एवं वार्षिक लाभ क्रमशः ₹3,001 करोड़ और ₹11,055 करोड़ दर्ज किया। परिणामस्वरूप, 31 मार्च, 2023 को समाप्त वर्ष के लिए प्रति शेयर अर्जन ₹41.86 प्रति शेयर रहा जबकि 31 मार्च, 2022 को यह ₹38.02 प्रति शेयर था। वर्ष के दौरान नेट वर्थ पर रिटर्न 20.23% था।
लाभ में वृद्धि के कारण नेट वर्थ 13% की वर्ष दर वर्ष वृद्धि के साथ 31 मार्च 2023 को ₹ 57,680 करोड़ हो गया था। लोन बुक ने अपनी गति को बनाए रखा है और 31 मार्च 2022 के ₹3.85 लाख करोड़ की तुलना में 13% की वृद्धि के साथ ₹4.35 लाख करोड़ हो गई है।
परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार को दर्शाते हुए 31 मार्च, 2023 को नेट-क्रेडिट-इम्पेयर्ड परिसंपत्तियां, एनपीए परिसंपत्तियों पर 70.64% के प्रावधान कवरेज अनुपात के साथ 1.01% तक घट गई हैं। वर्ष 2022-23 के दौरान कोई नया एनपीए नहीं जोड़ा गया।
कंपनी के गैर-विद्युत अवसरंचना क्षेत्र में प्रवेश ने अवसरंचना और लॉजिस्टिक्स सेगमेंट से ₹ 85,735 करोड़ की संस्वीकृति के साथ इसकी वृद्धि और विकास में सहायता की है। भारत सरकार के फोकस के अनुरूप कंपनी ने इस सेगमेंट में ₹ 21,371 करोड़ की संस्वीकृति के साथ अपने नवीकरणीय कारोबार में वृद्धि को जारी रखा है।
भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। आरईसी, ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाओं के वित्तपोषण में एक प्रमुख भागीदार होने के नाते, भारत में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के कार्यान्वयन की गति को तेज करने की दिशा में विभिन्न पहल की है और इस प्रकार से देश को वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की स्थापना के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिली है।
पारंपरिक नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं जैसे सौर और पवन परियोजनाओं के अलावा, आरईसी ने हाइब्रिड परियोजनाओं, ई-वाहन परियोजनाओं, पंप स्टोरेज परियोजनाओं, सोलर मॉड्यूल के निर्माण आदि के वित्तपोषण में कार्य किया है। सनराइज क्षेत्रों जैसे ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन एमोनिया के साथ-साथ चौबीस घंटे (आरटीसी) विद्युत परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण के अवसरों की तलाश की जा रही है, जिसमें थर्मल पावर के साथ नवीकरणीय परियोजनाओं को जोड़ना शामिल है और इथेनॉल विनिर्माण परियोजनाओं सहित कई अन्य का पता लगाया जा रहा है।
आरईसी की नवीकरणीय ऊर्जा की संस्वीकृति वित्तीय वर्ष 2017-18 के ₹7,034 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में ₹21,317 करोड़ हो गई और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में आरईसी की लोन बुक वित्तीय वर्ष 2017-18 के ₹7,506 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में ₹29,073 करोड़ हो गई। उपर्युक्त उपायों के साथ-साथ, आरईसी अपने नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो के तहत अपनी लोन बुक को वित्तीय वर्ष 2030 तक ₹2.4 लाख करोड़ तक बढ़ाने के लिए तैयार है। बहुत कम समय में, आरईसी ने चालू वित्तीय वर्ष अर्थात वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए नवीकरणीय ऊर्जा की ₹75,000 करोड़ की संस्वीकृति का लक्ष्य निर्धारित किया है ताकि वर्ष 2030 तक अपने लोन बुक के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
विलंबित भुगतान अधिभार (एलपीएस) योजना जून 2022 में शुरू की गई थी, इसकी शुरुआत के समय, राज्य यूटिलिटीज की कुल बकाया राशि ₹1.39 लाख करोड़ थी। तब से, नियम के अनुरूप, सभी राज्यों ने इस योजना को अपनाया है और आज की तिथि तक कुल बकाया देयताएं ₹80,000 करोड़ हैं। इसकी शुरुआत के एक वर्ष से भी कम समय में कुल बकाया देय राशि में 42% की कमी आई है। इस पहल ने विद्युत क्षेत्र को एक आकर्षक निवेश का अवसर बनाया है और यह इसके समग्र पोषण और वृद्धि में योगदान देगा।









