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मीडिया लाउंज

डीडीयूजीजेवाई योजना के तीन वर्ष
तारीख 19-05-2017

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अन्त्योदय (आख़िरी आदमी की सेवा) के दर्शन के अनुरूप भारत सरकार ने 20 नवंबर 2014, को दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) को मंजूरी दी थी, यह एक ऐसी समन्वित योजना है जिसमें ग्रामीण विद्युत वितरण, फीडर पृथक्करण, प्रणाली संवर्धन तथा मीटरिंग के सभी पहलू शामिल हैं। भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15  अगस्त 2015 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में 1000 दिनों के भीतर सभी अ-विद्युतीकृत गांवों को विद्युतीकृत करने की प्रतिज्ञा ली। इसीलिए, भारत सरकार ने ग्राम विद्युतीकरण के कार्य को मई 2018 तक पूरा करने के लिए इस कार्य को मिशन मोड पर आरम्भ कर दिया था।

देश के 18,452 अविद्युतीकृत जनगणना गांवों में से 13,469 गांवों को 15  मई 2017 तक विद्युतीकृत कर दिया गया है। 2013-14 और 2016-17 में ग्राम विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत भौतिक और वित्तीय प्रगति की एक तुलना नीचे दी गई है:

मापदण्ड

2013-14

2016-17

2017-18 का लक्ष्य

अ-विद्युतीकृत गांवों का विद्युतीकरण

1,197

6,015 (5.02 गुना)

शेष अ-विद्युतीकृत गांवों का मई 2018 तक विद्युतीकरण किया जाना है

गांवों का गहन विद्युतीकरण

 

14,956

63,330(4.2 गुना)

85,000

बीपीएल परिवारों* के लिए निःशुल्क विद्युत कनेक्शन

 

9.62

22.42(2.3 गुना)

40 लाख

राज्यों** को भारत सरकार द्वारा

 

रुपये. 2938.52 करोड़

रुपये. 7965.87 करोड़ (2.7 times)

रुपये. 4814 करोड़

अनुदान जारी किया गया

करोड़

रुपये. 2.7.52 करोड़

   

 

*30  अप्रैल 2017 तक बीपीएल परिवारों को नि:शुल्क बिजली कनेक्शन 256.81 लाख बीपीएल परिवारों को प्रदान कर दिया गया है

**किसी भी वित्तीय वर्ष की तुलना में राज्यों को अब तक का सर्वाधिक 7965.87 रुपये करोड़ रूपए का अनुदान जारी

पृष्ठभूमि

पूर्व की योजना के शेष ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यों को डीडीयूजीजेवाई में शामिल किया गया है। स्कीम का परिव्यय 43,033 करोड़ रूपये है जिसमें भारत सरकार का 33,453 करोड़ रुपए का अनुदान शामिल है। ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यों को शामिल करते हुए, इस योजना का समग्र परिव्यय, भारत सरकार से 63,027 करोड़ रुपये के अनुदान सहित , रु 75,893 करोड़ है।

नई डीडीयूजीजेवाई के तहत, भारत सरकार परियोजना लागत के 60% (विशेष श्रेणी राज्यों के लिए 85%) की दर से अनुदान प्रदान करती है। इसके अलावा, निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने पर 15% अनुदान की दर से अतिरिक्त अनुदान (विशेष श्रेणी राज्यों के लिए 5%) प्रदान किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत, फीडर पृथक्करण (15572.99 करोड़ रूपए), प्रणाली संवर्धन, ग्रामीण परिवारों को जोड़ने (19706.59 करोड़ रूपये), मीटरिंग (3874.48 करोड़ रूपये), ग्राम विद्युतीकरण (2792.57 करोड़ रूपये) और सांसद आदर्श ग्राम योजना (398.54 करोड़ रूपए) के कार्यों सहित 32 राज्यों/केंद्र शासित क्षेत्रों के लिए 42,553.17 करोड़ रूपए मंजूर किए गए हैं।

ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यों की प्रगति की निगरानी के लिए क्षेत्र में 350 से ज्यादा  ग्राम विद्युत अभियंता (जीवीए) तैनात तैनात किए गए हैं। गर्व मोबाइल ऐप (garv.gov.in) को 18.452 अ-विद्युतीकृत गांवों में निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप विद्युतीकरण की प्रगति की निगरानी के लिए विकसित किया गया था। जीवीए गर्व ऐप में फील्ड फोटो, डेटा और अन्य जानकारी अपडेट करते हैं| 20  दिसम्बर 2016 को, सभी 5.97 लाख गांवों आवास विद्युतीकरण की निगरानी के लिए अपडेटेड गर्व एप्लीकेशन का शुभारम्भ किया गया था। अपडेटेड गर्व में 'संवाद' की विशेष सुविधा है - पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए नागरिकों की भागीदारी।

इस योजना से गांव के लोगों की जीवन शैली बदलने और ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास होने की उम्मीद है। इस योजना के प्रमुख परिणाम निम्न हैं:

  • कृषि की उत्पादकता में वृद्धि
  • महिलाओं के श्रम को कम करना
  • बच्चों की शिक्षा में सुधार करना
  • सभी गांवों और परिवारों के लिए कनेक्टिविटी
  • ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवहार्य और विश्वसनीय बिजली सेवाएं
  • स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं की आपूर्ति में सुधार
  • संचार सुविधाओं में सुधार (रेडियो, टेलीफोन, टेलीविजन, मोबाइल)
  • प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार

इस योजना में स्थानीय आवश्यकताओं/राज्यों की प्राथमिकता के अनुसार कार्य का दायरा चुनने की पूरी छूट है। जनसंख्या संबंधी मानदंडों को छोड़ दिया गया है और बिना किसी आबादी के प्रतिबन्ध के सभी जनगणना गांवों/हैमलेट इस योजना के तहत पात्र हैं। राज्य डीपीआर तैयार करते समय जिला विद्युत समिति (डीईसी) से परामर्श ले रहे हैं तथा लोकसभा संसद सदस्यों की संसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) प्रस्ताव को योजना में शामिल करना अनिवार्य है। योजना की अन्य विशेषताएँ हैं- ई-टेंडरिंग और मानक बोली दस्तावेज का अनुपालन। निजी डिस्काम और ग्रामीण विद्युत सहकारी समितियां भी इस योजना के तहत पात्र हैं। इस योजना की समीक्षा दिशा (जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति) द्वारा की जा रही है। भारत सरकार ग्रामीण आबादी के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन करने और सबको 24x7 विद्युत (पीएफए) प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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